जयशंकर प्रसाद (30 जनवरी 1889 – 15 नवंबर 1937) हिंदी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख स्तंभ हैं। वे कवि, नाटककार, कहानीकार और उपन्यासकार थे। उनकी भाषा संस्कृतनिष्ठ और भावपूर्ण खड़ी बोली है। प्रमुख रचनाएँ: कामायनी (महाकाव्य), आँसू, लहर, झरना। प्रसाद जी के काव्य में प्रकृति का मानवीकरण, सौंदर्यबोध और करुणा की प्रधानता मिलती है।
'आत्मकथ्य' कविता में कवि ने अपने जीवन की कथा कहने से इनकार किया है। उनका मानना है कि उनका जीवन इतना महत्वहीन और दुखों से भरा है कि उसे सुनाकर वे दूसरों को निराश नहीं करना चाहते। वे अपने मन की व्यथा को छिपाकर मुस्कुराते रहने की बात करते हैं। यह कविता आत्म-संवाद और अंतर्मुखी भावों की अभिव्यक्ति है।
पद्यांश 1:
"मैं अपना जीवन-वृत्त कहूँ, मैंने सोचा था।
पर उसमें क्या धरा है?
कुछ छोटे-से सुख, कुछ बड़े-से दुख,
और एक व्यर्थ की करुणा।"
पद्यांश 2:
"मैंने भी सुख की चाह की,
पर पाया केवल अभाव।
रोते-रोते हँसना सीखा,
और हँसते-हँसते रोना।"
पद्यांश 3:
"मेरे जीवन की कथा क्या?
कुछ फूल, कुछ काँटे,
और एक मुरझाई-सी माला।
बस, इतना-सा आलोक है,
फिर असीम अँधेरा।"
पद्यांश 4:
"तुम क्या सुनोगे? व्यर्थ कथा है।
मेरी मुस्कान में ही सब कुछ है।
मैंने अपना आकाश रचा है,
अपनी ही धरती पर।"
प्रश्न 1: कवि अपनी आत्मकथा सुनाने से क्यों इनकार करता है?
उत्तर: कवि के अनुसार उसका जीवन इतना साधारण और दुखों से भरा है कि उसमें सुनाने लायक कुछ नहीं है। वह केवल छोटे सुख, बड़े दुख और करुणा से भरा है। वह नहीं चाहता कि उसकी व्यर्थ कथा सुनकर कोई और निराश हो।
प्रश्न 2: “रोते-रोते हँसना सीखा” पंक्ति का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि कवि ने जीवन में इतने दुख देखे कि अब वह दुखों के बीच भी हँसने का अभ्यास कर चुका है। वह अपने आँसुओं को मुस्कान के पीछे छिपा लेता है।
प्रश्न 3: कवि ने “मुरझाई-सी माला” किसे कहा है?
उत्तर: 'मुरझाई-सी माला' कवि के जीवन की उन निराशाओं और अधूरी इच्छाओं का प्रतीक है, जो कभी सुंदर थीं लेकिन अब समय और दुखों के कारण मुरझा गई हैं।
प्रश्न 4: कवि ने “अपना आकाश” और “अपनी धरती” रचने की बात क्यों कही?
उत्तर: कवि बाहरी दुनिया से कटकर अपने भीतर एक निजी संसार बसा चुका है। वह अपने ही विचारों, कल्पनाओं और भावनाओं में लीन रहता है, इसीलिए कहता है कि उसने अपना आकाश और धरती स्वयं रच ली है।
🌸 यह कविता आत्म-स्वीकृति और जीवन के द्वंद्व को अद्भुत रूप में प्रस्तुत करती है। परीक्षा के लिए भावार्थ और प्रतीकों को ध्यान से पढ़ें।